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Vakalatnama Format

भारतीय अधिवक्ताओं (Advocates) के लिए वकालतनामा (Vakalatnama) पर एक विस्तृत और व्यापक मार्गदर्शिका (Comprehensive Guide) प्रस्तुत है।

भारतीय अधिवक्ताओं के लिए 'वकालतनामा' पर विस्तृत मार्गदर्शिका

1. परिचय (Introduction)

वकालतनामा क्या है?

'वकालतनामा' वह आधिकारिक और कानूनी दस्तावेज (Legal Document) है जिसके माध्यम से कोई वादकारी (Litigant/Client) किसी अधिकृत अधिवक्ता (Advocate) को अदालत में उसका प्रतिनिधित्व करने, उसकी ओर से बहस करने, दस्तावेज दाखिल करने और मामले की पैरवी करने के लिए अधिकृत (Authorize) करता है। यह एक तरह का मुख्तारनामा (Power of Attorney) है जो विशेष रूप से अदालती कार्यवाही के लिए दिया जाता है।

इसका उपयोग कब किया जाता है?

जब भी कोई व्यक्ति (वादी या प्रतिवादी, अपीलकर्ता या प्रतिवादी) किसी दीवानी (Civil), फौजदारी (Criminal), राजस्व (Revenue) या अर्ध-न्यायिक (Quasi-judicial) अदालत में किसी वकील को अपनी कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए नियुक्त करता है, तो कार्यवाही शुरू होने से पहले या पहली पेशी पर यह दस्तावेज अदालत में दाखिल करना अनिवार्य होता है। इसके बिना कोई भी वकील अदालत में किसी पक्षकार की तरफ से पैरवी नहीं कर सकता।

2. विधिक ढांचा (Legal Framework)

भारतीय न्याय प्रणाली में वकालतनामा का संचालन मुख्य रूप से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS), सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (CPC) और भारतीय बार काउंसिल के नियमों (Bar Council of India Rules) के तहत होता है।

सिविल मामलों में: CPC के आदेश 3 नियम 4 (Order 3 Rule 4) के अनुसार, किसी भी वकील को अदालत में तब तक पेश होने का अधिकार नहीं है जब तक कि उसके पक्ष में लिखित रूप में वकालतनामा निष्पादित (Execute) न किया गया हो और उसे अदालत में न दाखिल किया गया हो। फौजदारी मामलों में: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS - जो पुराने CrPC, 1973 का स्थान लेता है) की धारा 340 (पूर्ववर्ती धारा 303) के तहत हर व्यक्ति जिसे किसी अपराध के लिए गिरफ्तार किया गया है या अदालत में पेश किया गया है, उसे अपनी पसंद के अधिवक्ता से बचाव करने का अधिकार है। वकालतनामा यह सुनिश्चित करता है कि वकील के पास अभियुक्त का प्रतिनिधित्व करने का विधिक अधिकार है। अधिवक्ता अधिनियम, 1961 (Advocates Act, 1961): इसके तहत केवल पंजीकृत और बार काउंसिल द्वारा सनद प्राप्त वकील ही वकालतनामा स्वीकार कर सकते हैं।

3. मुख्य घटक (Key Components)

एक वैध और त्रुटिहीन वकालतनामा में निम्नलिखित का होना अनिवार्य है:

न्यायालय का नाम (Name of the Court): अदालत का सटीक विवरण (जैसे- माननीय सत्र न्यायालय, दिल्ली / जिला सिविल जज की अदालत)।

वाद संख्या (Case Number): यदि मामला दर्ज हो चुका है, तो वाद/अपराध संख्या और वर्ष (Case Number and Year)।

पक्षकारों के नाम (Cause Title): वादी (Plaintiff/Complainant) बनाम प्रतिवादी/अभियुक्त (Defendant/Accused) का नाम।

वकील का नाम और विवरण: अधिवक्ता का नाम, नामांकन संख्या (Enrollment Number), और कार्यालय का पता।

मुक्किल की सहमति (Client's Consent): मुक्किल के हस्ताक्षर या अंगूठे का निशान।

शर्तें और अधिकार (Clauses/Powers): मुक्किल द्वारा वकील को दिए जाने वाले अधिकार (जैसे- बहस करना, दस्तावेज दाखिल करना, समझौता करना, अपील करना, फीस तय करना आदि)।

अधिवक्ता की स्वीकृति (Acceptance by Advocate): वकील के हस्ताक्षर जो यह दर्शाते हैं कि उन्होंने वकालतनामा स्वीकार कर लिया है।

कल्याण निधि और टिकट (Welfare Stamps/Court Fees): संबंधित राज्य के बार काउंसिल वेलफेयर स्टाम्प और कोर्ट फीस स्टाम्प (यदि लागू हो)।

4. मानक प्रारूप / टेम्पलेट (Standard Format Template)

नीचे एक मानक वकालतनामा का प्रारूप दिया गया है, जिसे अधिवक्ता अपने उपयोग के लिए अनुकूलित कर सकते हैं:

न्यायालय: (न्यायालय का नाम और पदनाम)

मुकदमा संख्या: सन 20_

फौजदारी / दीवानी मुकदमा संख्या:

पक्षकार:

वादी / अपीलकर्ता / प्रार्थी / अभियुक्त

बनाम

प्रतिवादी / विपक्षी

वकालतनामा

मैं / हम (मुक्किल का नाम) पुत्र/पुत्री/पत्नी निवासी इस मुकदमे में वादी / प्रतिवादी / अपीलकर्ता / अभियुक्त हूँ / हूँ।

मैं इसके द्वारा सर्वश्री अधिवक्तागण:

(एडवोकेट)

(एडवोकेट)

को अपना अधिवक्ता (Counsel) नियुक्त करता/करती हूँ और उन्हें अपने इस मामले में उपरोक्त न्यायालय तथा किसी भी उच्च न्यायालय या अपीलिय न्यायालय में मेरी ओर से पैरवी करने, बहस करने, दस्तावेज दाखिल या वापस लेने, गवाहों की परीक्षा करने, किसी भी समझौते या सुलह (Compromise) में भाग लेने, और इस मुकदमे के संचालन के लिए आवश्यक समस्त कार्य करने के लिए अधिकृत करता/करती हूँ।

विशेष शर्तें:

मुकदमे की पैरवी की फीस तय हो चुकी है, जिसका भुगतान मेरे द्वारा समय पर किया जाएगा।

मुकदमे के सिलसिले में होने वाला अन्य खर्च (जैसे- टाइपिंग, कोर्ट फीस, मुंशी खर्चा आदि) मैं अलग से वहन करूँगा/करूँगी।

मेरे अधिवक्तागण इस बात के लिए स्वतंत्र होंगे कि वे इस मामले में किसी अन्य वरिष्ठ या सहायक अधिवक्ता को भी शामिल कर सकते हैं।

यदि मुकदमे के दौरान कोई राशि या संपत्ति न्यायालय द्वारा मुझे प्राप्त होती है, तो मेरे अधिवक्ता उसे प्राप्त कर सकते हैं और उसकी रसीद दे सकते हैं।

मैं अपने पूरे होश-हवास में, बिना किसी दबाव या प्रलोभन के, यह वकालतनामा निष्पादित (Execute) कर रहा/रही हूँ, जो मुझे मान्य होगा।

दिनांक: स्थान:

मुक्किल के हस्ताक्षर / अंगूठे का निशान

नाम: मोबाइल नंबर:

अधिवक्ता द्वारा स्वीकृति:

उपरोक्त वकालतनामा मैं/हम स्वीकार करता/करते हैं। मैंने/हमने मुक्किल से मामले की सभी बातें समझ ली हैं।

अधिवक्ता के हस्ताक्षर

नाम: नामांकन संख्या (Enrollment No.): मोहर और पता: _

(नोट: इस पर नियमानुसार राज्य बार काउंसिल वेलफेयर स्टाम्प (Welfare Stamp) और कोर्ट फीस अवश्य चस्पा करें।)

5. याद रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें (Important Points to Remember)

स्टाम्प और कोर्ट फीस: वकालतनामा पर राज्य बार काउंसिल के नियमानुसार 'वेलफेयर फंड स्टाम्प' (Welfare Fund Stamp) लगाना न भूलें। इसके बिना कई अदालतें वकालतनामा स्वीकार नहीं करतीं।

वकील के हस्ताक्षर और स्वीकारोक्ति: वकील द्वारा वकालतनामा पर हस्ताक्षर करना और उसे स्वीकार करना अनिवार्य है (CPC Order 3 Rule 4 के तहत)।

पहचान और मोबाइल नंबर: मुक्किल का सही मोबाइल नंबर और पता वकालतनामा पर जरूर होना चाहिए ताकि भविष्य में समन या संवाद में आसानी हो।

एकाधिक वकील (Joint Advocates): यदि एक से अधिक वकीलों को नामित किया जा रहा है, तो सभी के नाम स्पष्ट रूप से लिखे जाने चाहिए।

मूल प्रति दाखिल करना: हमेशा वकालतनामा की मूल प्रति (Original Copy) अदालत में दाखिल करें।

6. सामान्य गलतियाँ जिनसे बचना चाहिए (Common Mistakes to Avoid)

हस्ताक्षर या अंगूठे का निशान छूट जाना: कई बार मुक्किल वकालतनामा पर हस्ताक्षर करना भूल जाते हैं, जिससे वह कानूनी रूप से अमान्य हो जाता है।

नामांकन संख्या (Enrollment Number) का अभाव: अधिवक्ता द्वारा अपना बार काउंसिल एनरोलमेंट नंबर न लिखना एक बड़ी तकनीकी गलती है।

अदालत का नाम खाली छोड़ना: बिना अदालत के नाम या केस नंबर के वकालतनामा प्रिंट करवाकर रख लेना और बाद में भरना, कई बार मुक्किल के अधिकारों का दुरुपयोग लग सकता है।

वेलफेयर स्टाम्प न लगाना: कई बार जल्दबाजी में बार काउंसिल वेलफेयर स्टाम्प चिपकाना भूल जाते हैं, जिससे डिफेक्ट (Defect) निकल आता है।

अधूरा प्राधिकरण: यदि मुक्किल ने अपील या निष्पादन (Execution) का अधिकार नहीं दिया है, तो वकील आगे की अपील दाखिल करने में कानूनी अड़चन का सामना कर सकता है। अतः व्यापक अधिकार (Comprehensive Powers) का खंड होना चाहिए।

7. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्र 1: क्या बिना वकालतनामा के कोई वकील कोर्ट में बहस कर सकता है?

उ: नहीं। सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) और बार काउंसिल के नियमों के अनुसार, जब तक वकील के पक्ष में विधिवत निष्पादित वकालतनामा अदालत में दाखिल नहीं किया जाता, तब तक वह किसी पक्षकार की तरफ से पैरवी या बहस नहीं कर सकता। केवल 'मेमो ऑफ़ अपीयरेंस' (Memo of Appearance) कुछ विशेष और आपातकालीन स्थितियों में ही अल्पकालिक राहत के लिए स्वीकार किया जाता है।

प्र 2: क्या एक ही वकालतनामा पर कई वकीलों के नाम हो सकते हैं?

उ: हाँ, एक ही वकालतनामा में एक से अधिक वकीलों (पैनल या चैंबर के वकीलों) के नाम दर्ज किए जा सकते हैं। मुक्किल चाहें तो उन सभी को या उनमें से किसी एक को अधिकृत कर सकता है।

प्र 3: क्या वकालतनामा रद्द (Cancel) किया जा सकता है?

उ: हाँ। मुक्किल को यह पूर्ण अधिकार है कि वह अपने वकील को कभी भी बदल सकता है (Change of Counsel)। इसके लिए 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) की प्रक्रिया अपनाई जाती है और अदालत की अनुमति से नया वकालतनामा दाखिल किया जाता है।

प्र 4: क्या कॉर्पोरेट या कंपनी के मामलों में वकालतनामा का प्रारूप अलग होता है?

उ: हाँ। कंपनी, फर्म या सोसाइटी के मामले में, वकालतनामा पर हस्ताक्षर करने वाले व्यक्ति (जैसे- निदेशक, प्रबंधक या अधिकृत अधिकारी) के पास बोर्ड रेसोल्यूशन (Board Resolution) या अधिकृत पत्र होना चाहिए जो यह साबित करे कि वह कंपनी की ओर से वकील नियुक्त करने के लिए अधिकृत है।

प्र 5: क्या ईमेल या डिजिटल हस्ताक्षर (Digital Signatures) वाला वकालतनामा वैध है?

उ: सामान्यतः भौतिक न्यायालयों (Physical Courts) में मुक्किल के मूल भौतिक हस्ताक्षर (Physical Signature) या अंगूठे के निशान की मांग की जाती है। हालांकि, ई-फाइलिंग (E-filing) और वर्चुअल अदालतों के दौर में आईटी एक्ट के तहत डिजिटल हस्ताक्षरित दस्तावेजों को भी मान्यता दी जा रही है, लेकिन स्थानीय अदालत के नियमों और प्रैक्टिस का पालन करना सबसे सुरक्षित है।

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