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Power of Attorney Format

भारतीय अधिवक्ताओं (Advocates) के लिए पावर ऑफ अटॉर्नी (Power of Attorney - POA) पर एक विस्तृत और व्यापक कानूनी मार्गदर्शिका (Comprehensive Guide)।

भारत में 'पावर ऑफ अटॉर्नी' (Mukhtarnama): अधिवक्ताओं के लिए एक विस्तृत मार्गदर्शिका

1. परिचय (Introduction)

पावर ऑफ अटॉर्नी (POA) एक महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेज है, जिसके माध्यम से एक व्यक्ति (जिसे निष्पादक या Principal कहा जाता है) किसी अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों (जिसे एजेंट या Attorney कहा जाता है) को अपने कुछ विशेष या सभी कानूनी, वित्तीय, व्यावसायिक या संपत्ति संबंधी मामलों में अपने प्रतिनिधि के रूप में कार्य करने का अधिकार देता है।

यह कब उपयोग किया जाता है:

जब प्रिंसिपल (Principal) देश से बाहर रहता हो और भारत में अपनी संपत्ति की देखभाल या बिक्री करनी हो। जब स्वास्थ्य कारणों या बुढ़ापे के कारण प्रिंसिपल व्यक्तिगत रूप से अदालतों, बैंकों या सरकारी कार्यालयों में जाने में असमर्थ हो। व्यावसायिक मामलों में, जैसे कंपनी के मुकदमों का संचालन, चेक बाउंस के मामले (NI Act), या अनुबंधों पर हस्ताक्षर करना। कानूनी और अदालती कार्रوایوں के लिए (वकील या अन्य व्यक्ति को अधिकृत करने हेतु)।

2. कानूनी ढांचा (Legal Framework)

भारत में पावर ऑफ अटॉर्नी का संचालन मुख्य रूप से निम्नलिखित कानूनों द्वारा किया जाता है:

पावर ऑफ अटॉर्नी अधिनियम, 1882 (Powers of Attorney Act, 1882): यह अधिनियम POA के निष्पादन और उससे जुड़े बुनियादी नियमों को परिभाषित करता है। भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 (Indian Contract Act, 1872): चूंकि POA एक प्रकार की एजेंसी (Agency) का अनुबंध है, इसलिए इसके अध्याय X (धारा 182 से 238) इसकेREVOCATION (रद्द करने), अधिकारों और दायित्वों को नियंत्रित करते हैं। भारतीय पंजीकरण अधिनियम, 1908 (Registration Act, 1908 - धारा 17): अचल संपत्ति (Immovable Property) के हस्तांतरण या बिक्री से संबंधित POA का पंजीकरण अनिवार्य है। यदि POA किसी पारिवारिक सदस्य को बिना प्रतिफल (Consideration) के दिया गया है, तो राज्यों के स्टाम्प अधिनियम के अनुसार स्टाम्प ड्यूटी लगती है। नए आपराधिक कानून (BNS, BNSS, BSA): आपराधिक मामलों या अदालती दस्तावेजों के संदर्भ में, भारतीय साक्ष्य अधिनियम (अब भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 - BSA) की धाराएं POA के माध्यम से दिए गए बयानों या दस्तावेजों को प्रमाणित करने पर लागू होती हैं। आपराधिक प्रक्रिया संहिता की जगह अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) लागू है, जिसके तहत वकीलों या एजेंटों के माध्यम से कोर्ट में प्रतिनिधित्व के प्रावधान हैं।

3. मुख्य घटक (Key Components)

एक वैध और मजबूत पावर ऑफ अटॉर्नी में निम्नलिखित का होना अनिवार्य है:

प्रिंसिपल और एजेंट का विवरण: दोनों पक्षों का पूरा नाम, पिता का नाम, आयु, आधार/पैन और पूरा आवासीय पता।

शक्तियों का स्पष्ट दायरा (Scope of Powers): एजेंट को क्या करने का अधिकार है और क्या नहीं, यह बिल्कुल स्पष्ट होना चाहिए (General vs. Special POA)।

उद्देश्य और कारण: POA जारी करने का स्पष्ट उद्देश्य।

प्रतिस्थापन खंड (Power of Substitution/Delegation): क्या एजेंट आगे किसी अन्य व्यक्ति को यह अधिकार सौंप सकता है या नहीं।

रद्द करने का खंड (Revocation Clause): प्रिंसिपल इसे कब और कैसे रद्द कर सकता है (आम तौर पर प्रिंसिपल की मृत्यु पर यह स्वतः समाप्त हो जाता है)।

हस्ताक्षर और गवाह: प्रिंसिपल और एजेंट दोनों के हस्ताक्षर तथा कम से कम दो स्वतंत्र गवाहों के हस्ताक्षर।

नोटरीकरण/पंजीकरण (Notarization & Registration): सक्षम प्राधिकारी द्वारा नोटरी या सब-registrar के समक्ष निष्पादन।

4. मानक प्रारूप / टेम्पलेट (Standard Format Template)

(नोट: यह एक सामान्य प्रारूप है, मामले की प्रकृति के अनुसार इसमें संशोधन किया जा सकता है)

सामान्य पावर ऑफ अटॉर्नी (General Power of Attorney)

यह पावर ऑफ अटॉर्नी आज दिनांक [दिनांक] को [स्थान] पर निष्पादित की जाती है:

द्वारा:

श्री [प्रिंसिपल का नाम], पुत्र/पत्नी [पिता/पति का नाम], निवासी [पूर्ण पता], (जिन्हें आगे "प्रिंसिपल" कहा जाएगा)।

के पक्ष में:

श्री [एजेंट का नाम], पुत्र [पिता का नाम], निवासी [पूर्ण पता], (जिन्हें आगे "एजेंट / अटॉर्नी" कहा जाएगा)।

जबकि, प्रिंसिपल अपनी व्यक्तिगत व्यस्तता और स्वास्थ्य कारणों से अपनी चल और अचल संपत्तियों की देखरेख, प्रबंधन और अदालती कार्यों के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने में असमर्थ है;

अतः अब यह पावर ऑफ अटॉर्नी निम्नलिखित प्रकार से साक्षी है:

प्रिंसिपल इसके द्वारा श्री [एजेंट का नाम] को अपना वैध और असली अटॉर्नी नियुक्त करता है ताकि वह मेरी ओर से निम्नलिखित कार्य कर सके:

a. भारत में स्थित मेरी किसी भी अचल संपत्ति को किराए पर देना, उसके किराए की वसूली करना और रसीदें जारी करना। b. विभिन्न अदालतों, न्यायाधिकरणों (Tribunals), और सरकारी कार्यालयों (जैसे तहसील, नगर निगम, विकास प्राधिकरण) में मेरा प्रतिनिधित्व करना। c. वाद-पत्र (Plaints), लिखित बयान (Written Statements), हलफनामा (Affidavits), और आवेदन दाखिल करना तथा उन पर हस्ताक्षर करना। d. बैंक खातों का संचालन करना, चेक जारी करना और वित्तीय लेन-देन करना।

एजेंट द्वारा इस दस्तावेज के तहत किए गए सभी वैध कार्य मेरे स्वयं के किए गए कार्यों की तरह माने जाएंगे और मुझे स्वीकार्य होंगे।

यह पावर ऑफ अटॉर्नी तब तक प्रभावी रहेगी जब तक कि इसे लिखित रूप से प्रिंसिपल द्वारा रद्द (Revoke) नहीं किया जाता या प्रिंसिपल की मृत्यु नहीं हो जाती।

इसके साक्ष्‍य में, प्रिंसिपल ने नीचे अपने हस्ताक्षर किए हैं।

हस्ताक्षर:

(प्रिंसिपल)

हस्ताक्षर (एजेंट की स्वीकृति के रूप में):

(एजेंट)

गवाह (Witnesses):

नाम और पता: हस्ताक्षर: _

नाम और पता: हस्ताक्षर: _

नोटरी / सब-registrar का प्रमाणीकरण (Notary/Registration Endorsement)

5. अधिवक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण बिंदु (Important Points to Remember)

विशेष बनाम सामान्य (General vs. Special POA): यदि मामला किसी एक संपत्ति की बिक्री या एक मुकदमे से जुड़ा है, तो Special Power of Attorney (SPA) का उपयोग करें। यदि व्यापक अधिकार देने हैं, तो General Power of Attorney (GPA) का उपयोग करें। स्टाम्प ड्यूटी (Stamp Duty): हर राज्य के स्टाम्प अधिनियम (State Stamp Act) के अनुसार POA पर अलग-अलग स्टाम्प ड्यूटी लगती है। अपर्याप्त स्टाम्प ड्यूटी वाला दस्तावेज अदालत में साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य नहीं होता है। पंजीकरण की अनिवार्यता: माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्णयों (विशेषकर सूरज लैंप एंड इंडस्ट्रीज बनाम राज्य हरियाणा) के अनुसार, केवल GPA के आधार पर अचल संपत्ति का स्वामित्व हस्तांतरित नहीं किया जा सकता। संपत्ति के हस्तांतरण के लिए रजिस्टर्ड सेल डीद (Sale Deed) ही वैध है। एजेंट की fiduciary duty: एजेंट प्रिंसिपल के प्रति विश्वास के कर्तव्य (Fiduciary duty) से बंधा है। वह प्रिंसिपल के हितों के विरुद्ध संपत्ति का लाभ अपने नाम नहीं कर सकता।

6. सामान्य गलतियाँ जिनसे बचें (Common Mistakes to Avoid)

अस्पष्ट भाषा (Vague Language): शक्तियों का दायरा स्पष्ट न लिखना, जिससे भविष्य में विवाद उत्पन्न हो।

बिना पंजीकरण के अचल संपत्ति का लेन-देन: स्टाम्प ड्यूटी से बचने के लिए बिना रजिस्टर्ड POA के संपत्ति बेचने का प्रयास करना (जो कि अवैध है)।

मानसिक क्षमता (Mental Capacity) की उपेक्षा: यदि प्रिंसिपल निष्पादन के समय मानसिक रूप से अस्वस्थ (Unsound mind) है, तो POA शून्य (Void) हो जाता है।

गवाहों की अनुपस्थिति: पर्याप्त और विश्वसनीय गवाहों के हस्ताक्षर न होना।

रद्द होने के बाद भी उपयोग: प्रिंसिपल की मृत्यु या POA रद्द होने के बावजूद एजेंट द्वारा उसका उपयोग जारी रखना।

7. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्र 1: क्या भारत से बाहर (NRI द्वारा) निष्पादित POA भारत में मान्य है?

उत्तर: हाँ, यदि कोई NRI बाहर POA निष्पादित करता है, तो उसे उस देश में स्थित भारतीय दूतावास (Indian Embassy/Consulate) या नोटरी पब्लिक द्वारा सत्यापित (Attested) कराना होगा। भारत आने के बाद, भारतीय पंजीकरण अधिनियम की धारा 85 के तहत 3 महीने के भीतर इसे संबंधित उप-पंजीयक (Sub-Registrar) के पास प्रस्तुत करना होता है।

प्र 2: क्या पावर ऑफ अटॉर्नी को कभी भी रद्द (Revoke) किया जा सकता है?

उत्तर: हाँ, प्रिंसिपल को किसी भी समय POA को रद्द करने का अधिकार है, बशर्ते कि एजेंट को उस रद्द करने की विधिवत सूचना (Notice of Revocation) दे दी गई हो और इसे सार्वजनिक रूप से भी अधिसूचित किया जा सकता है।

प्र 3: क्या GPA के आधार पर संपत्ति की रजिस्ट्री (Sale Deed) की जा सकती है?

उत्तर: सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के अनुसार, केवल जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) के आधार पर संपत्ति का मालिकाना हक ट्रांसफर नहीं किया जा सकता, जब तक कि इसके साथ रजिस्टर्ड सेल डीद (Sale Deed) या ट्रांसफर डीड न हो। हालांकि, मालिक की ओर से बेचने का अधिकार POA धारक को दिया जा सकता है।

प्र 4: प्रिंसिपल की मृत्यु के बाद क्या POA वैध रहता है?

उत्तर: नहीं। भारतीय संविदा अधिनियम के तहत, प्रिंसिपल या एजेंट की मृत्यु (Death), दिवालियापन (Insolvency), या पागलपन (Insanity) होने पर POA स्वतः समाप्त (Terminate) हो जाता है।

प्र 5: क्या कोर्ट में केस लड़ने के लिए वकील को POA की आवश्यकता होती है?

उत्तर: आमतौर पर कोर्ट में वकीलों के लिए वकालतनामा (Vakalatnama) निष्पादित किया जाता है, न कि पावर ऑफ अटॉर्नी। हालांकि, यदि कोई कॉर्पोरेट इकाई या विदेश में बैठा व्यक्ति किसी पारिवारिक सदस्य या प्रबंधक को मुकदमे की पैरवी का अधिकार देता है, तो उस स्थिति में POA का उपयोग किया जाता है।

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